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खंदेरी का जलावतरण क्या है?

खंदेरी भारतीय नौसेना हेतु निर्माणाधीन ‘कलवरी श्रेणी’ की 6 पनडुब्बियों की शृंखला की दूसरी पनडुब्बी है। यह एक डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बी है। उल्लेखनीय है कि इसी नाम की एक पनडुब्बी भारतीय नौसेना में वर्ष 1968 से 1989 के मध्य तैनात थी जो तत्कालीन सोवियत संघ की ‘फॉक्सट्रोट श्रेणी’ (Foxtrot Class) की पनडुब्बियों पर आधारित थी।

  • कब?
    12 जनवरी, 2017 को रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे द्वारा खंदेरी का जलावतरण संपन्न किया गया जिसके बाद अब इस पनडुब्बी के समुद्री परीक्षण आरंभ किए जा सकेंगे।
  • परियोजना-75
    उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मुंबई स्थित माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा परियोजना-75 के तहत कलवरी श्रेणी की 6 पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। ये पनडुब्बियां फ्रांस की ‘स्कॉर्पीन श्रेणी’ (Scorpene Class) की पनडुब्बियों पर आधारित हैं। ज्ञातव्य है कि भारतीय नौसेना हेतु स्कॉर्पीन श्रेणी की 6 पनडुब्बियों के निर्माण के लिए अक्टूबर, 2005 में भारत और फ्रांस के मध्य 3.5 बिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। समझौते के तहत इन पनडुब्बियों का निर्माण फ्रांस के ‘मेसर्स डीसीएनएस’ (M/s DCNS) से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Transfer of Technology) के माध्यम से भारत में माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है।
  • प्रथम पनडुब्बी कलवरी
    कलवरी परियोजना-75 के तहत विकसित प्रथम पनडुब्बी है। इस पनडुब्बी का जलावतरण अक्टूबर, 2015 में संपन्न हो चुका है। वर्तमान में इस पनडुब्बी के समुद्री परीक्षण किए जा रहे हैं। कलवरी पनडुब्बी को टाइगर शार्क भी कहा जाता है जो शार्क मछली की एक प्रजाति है।
  • विशेषताएं
    स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों पर आधारित कलवरी वर्ग की पनडुब्बियों की लंबाई 67 मीटर एवं चौड़ाई 6.2 मीटर है तथा इनकी विस्थापन क्षमता 1550 टन है। ये पनडुब्बियां एक विशेष प्रकार के इस्पात (स्टील) द्वारा निर्मित हैं जो उच्च तनाव सहने की क्षमता व उच्च तन्यता की विशेषता से युक्त है। इस विशेषता के कारण ये पनडुब्बियां उच्च ‘द्रव-स्थैतिक बल’ (Hydrostatic Force) को सहन कर जल में अधिक गहराई तक गोता लगा सकती हैं जिससे इनकी स्टील्थ विशेषताओं में भी वृद्धि होती है। ये पनडुब्बियां जलमग्न होकर या जल की सतह पर आकर टॉरपीडो व पोत-रोधी मिसाइलों से हमला कर सकती हैं।
  • निष्कर्ष
    स्कॉर्पीन श्रेणी की पहली दो डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों क्रमशः कलवरी एवं खंदेरी की भारतीय नौसेना में तैनाती वर्ष 2017 के अंत तक संभावित है जबकि इस श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी का जलावतरण भी इसी वर्ष किए जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि भारतीय नौसेना का पनडुब्बी विभाग वर्ष 2017 में अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है और ऐसे में परियोजना-75 के तहत विकसित पहली दो पनडुब्बियों के नौसेना के बेड़े में शामिल होने से देश की पनडुब्बी क्षमताओं में एक नए अध्याय की शुरुआत होगी।

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